कम्पनी नहीं कर रही मजदूरों के ईपीएफ का पैसा जमा, CITU बना रहा संघर्ष की रूपरेखा

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Himachal VOICE (मंडी/अश्वनी भारद्वाज) : सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (CITU) की बल्ह इकाई ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस की जिसमें विशेष तौर पर सीटू जिला सचिव साथी राजेश शर्मा उपस्थित हुए और साथ में गोपेन्द्र शर्मा, सुरेश सरवाल और परसराम  प्रेस कांफ्रेंस में शामिल हुए।

केएमसी कंपनी जो नाग चला से पंडोह तक फोरलेन निर्माण कर रही है इसके पास लगभग 500 लोग काम करते हैं उनमें से करीब 300 लोग केएमसी के पास हैं और बाकी पेटी कांट्रेक्टर के पास हैं। इनमें से करीब ढाई सौ लोग स्थानीय मजदूर हैं जो केएमसी में काम करते हैं। केएमसी जब से काम कर रही है इन्होंने कभी भी समय पर मजदूरों के वेतन का भुगतान नहीं किया श्रम कानूनों को लागू नहीं किया।

श्रम विभाग हिमाचल प्रदेश और सहायक श्रम आयुक्त चंडीगढ़ हो बार-बार इनसे वेतन लेने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा। इसके बावजूद भी पिछले 2 महीने का वेतन मजदूरों का लंबित है अभी मजदूरों के सामने बड़ी समस्या है यह खड़ी हो गई है कि कंपनी ने ईपीएफ का पैसा पिछले 3 साल से ईपीएफ विभाग में जमा नहीं करवाया है जो मजदूर के वेतन से पैसा कटा वह भी नहीं जमा करवाया और जो कंपनी ने अपना हिस्सा उसमें डालना था वह भी जमा नहीं करवाया जो लगभग एक करोड़ बनता है।

कंपनी को कई बार बताया गया कि इस पैसे को जमा करवाएं परंतु वह हमेशा टालमटोल करते रहे और ऐसा प्रतीत होता है कि कंपनी पैसा हड़पने जा रही है। इस बाबत जब एक पत्र राकेश कुमार अध्यक्ष और लेखराज जोकि इकाई सचिव हैं उन्होंने कंपनी को दिया तो कंपनी में बजाए इसके की ईपीएफ का पैसा जमा करवाते लेखराज को ही नौकरी से निकाल दिया। कंपनी डरा धमका कर के पैसा हड़पना चाहती है, वह जमा करवाने नहीं जा रहे हैं।

इस बाबत सीटू की स्थानीय इकाई पुलिस विभाग को भी चिट्ठी लिखी है परंतु उसमें अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है। सीटू का साफ मानना है की कंपनी के खिलाफ आईपीसी की धारा 406 और 409 के तहत मुकदमा दर्ज किया जाए ताकि मजदूरों का ईपीएफ का पैसा जमा हो सके और लेखराज को तत्काल नौकरी पर लिया जाए। ईपीएफ के जमा होने से मजदूरों को पेंशन का लाभ मिलता है, अगर किसी दुर्घटना वश मौत हो जाए तो उसमें मुआवजा मिलता है फैमिली पेंशन मिलती है। कंपनी अगर पैसा जमा नहीं करवाती है तो मजदूर इन सुविधाओं से महरूम हो जाएगा।

सीटू की जिला कमेटी की बैठक 18 सितंबर को होगी और कंपनी के खिलाफ संघर्ष की रूपरेखा बनाई जाएगी। पुलिस और प्रशासन से मुलाकात करके कंपनी के खिलाफ तुरंत कार्यवाही करने के लिए अनुरोध किया जाएगा।

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