किसान विरोधी बिल को वापिस लेने के लिए मंंडी में गरजे किसान सभा कार्यकर्ता

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Himachal VOICE (मंडी/अश्वनी भारद्वाज): आज अखिल भारतीय किसान सभा के भारत बंद के आह्वान पर पूरे भारतवर्ष में पूर्ण बंद किया गया। उसी संदर्भ में मंडी में किसान सभा और सीटू ने मिलकर विरोध प्रदर्शन किया।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने तीन बिलों को संसद से पास करवा करके किसानों के ऊपर एक बहुत बड़ा हमला बोला है जिसमें पहला कानून है एपीएमसी एक्ट में बदलाव। सरकार मंडियों का संचालन नहीं करेगी जिससे किसान उत्पाद को बेचना मुश्किल होगा वैसे तो सरकार का कहना यह है बड़ी कंपनियां किसान का उत्पाद खरीदेगी। यह सरासर किसान के साथ धोखा है यदि मंडियां खत्म हो जाती हैं तो किसान अपना उत्पाद कैसे  बेच पाएगा। सरकार के द्वारा दिया गया तर्क बेमानी है। 

दूसरा कानून एसेंशियल कमोडिटी एक्ट में बदलाव करना है , 1955 में एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट बना था जिससे कालाबाजारी पर लगाम लगाई गई थी अब सरकार पुनः उस कानून को बदल कर के बड़े पूंजीपतियों और कंपनियों को खुली छूट दे रही है कि वह जितनी मर्जी भंडारण कर ले जिससे बाजार में अनाज की किल्लत पैदा होगी दाल और दलहन की कीमत किल्लत पैदा होगी और मौके पर आकर के यह कंपनियां महंगे दाम पर उत्पाद बेच के जिसे उन्होंने किसानों से औने पौने दाम पर खरीदा होगा भारी लूट मचाएंगे। 

तीसरा कानून कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग को लेकर बड़ी कंपनियां आकर के किसानों की जमीनों पर कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग करेंगे इसका मतलब है कि यह कंपनियां यहां पर बीज बेचेंगे इंसेक्टिसाइड और पेस्टिसाइड बेचेंगे और जब किसान का उत्पाद होगा तो उसमें से विशेष ग्रेड को खरीद लिया जाएगा और बाकी उपज किसान की छूट जाएगी। केंद्र सरकार ने किसान संगठनों की कोई बात नहीं सुनी पहले किसान आत्महत्या कर रहा है और अब उसका संकट और बढ़ जाएगा।

इन कानूनों को पास करने का जो तरीका मोदी सरकार ने चुना वह बेहद खतरनाक और संसदीय लोकतंत्र पर एक बहुत बड़ा हमला है जिसमें राज्यसभा में जहां सरकार का बहुमत नहीं है उसने सांसदों द्वारा वोट करवाने की प्रक्रिया को ना मानते हुए ध्वनि मत से यह कहिए कि हेकड़ी से इसे पास करवाया है। जिससे किसान संगठन नाराज हैं और सड़कों पर आंदोलन कर रहे हैं यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक यह कानून पलट नहीं दिए जाते हैं।

मोदी सरकार द्वारा यह आश्वासन की न्यूनतम समर्थन मूल्य जारी रहेगा एक बहुत बड़ा झूठ है क्योंकि इसे कानूनी अमलीजामा नहीं पहनाया गया यह केवल वैसा ही जुमला है जैसे 2 करोड रोजगार प्रतिवर्ष देने का यहां तक की जो नौकरियां थी वह भी खत्म कर दी गई नए रोजगार का सृजन नहीं किया गया इसी प्रकार से इन कानूनों का किसानों के ऊपर दुष्प्रभाव ही पड़ेगा कि उनका कोई भला नहीं होगा। उनको लूटने की छूट इस सरकार ने कंपनियों को दे दी है किसान सभा व सीटू किसानों और मजदूरों के इस आंदोलन को तब तक जारी रखेंगे जब तक सरकार अपना फैसला नहीं पलटते और इन कानूनों को रद्द नहीं किया जाता।

इस अवसर पर किसान सभा जिला कमेटी सदस्य जोगिंदर वालिया सीटू जिला महासचिव राजेश शर्मा महिला समिति जिला अध्यक्ष विना वैद्य और नौजवान सभा जिला सचिव सुरेश सरवाल, गोपिदर कुमार, रमेश गुलेरिया, हेमराज वालिया, अनिल गंगाराम, सुरेंद्र कुमार इत्यादि ने हिस्सा लिया।

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