धर्मपुर का बिजली विभाग पच्चीस प्रतिशत फ़ील्ड स्टाफ़ के सहारे : भूपेंद्र सिंह

0
74

 

Himachal VOICE ब्यूरो, धर्मपुर। ज़िला परिषद सदस्य भूपेंद्र सिंह द्वारा सूचना के अधिकार क़ानून के तहत ली गई जानकारी के अनुसार धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र में बिजली विभाग में कुल 260 कर्मचारियों के पद सृजित हैं, लेकिन उनमें से 130 पद ख़ाली हैं जबकि यहां से सातवीं बार जीते विधायक वर्तमान सरकार में सबसे वरिष्ठ मंत्री हैं और उन्हीं के गृह क्षेत्र में आधी पोस्टें ख़ाली होना बहुत बड़ा सवाल व चिंता का विषय है।

भूपेंद्र सिंह ने बताया कि धर्मपुर मंडल के अंतर्गत तीन उपमंडल और 14 अनुभाग हैं, जिनके तहत विभिन्न क्षमताओं के 410 ट्रांसफार्मर स्थापित किये गए हैं जो 26863 उपभोक्ताओं को बिजली पहुंचानें का कार्य करने का कार्य कर रहे हैं। लेकिन इसमें सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि यहां आधे पद कर्मचारियों के ख़ाली पड़े हैं, जिसके कारण बिजली बाधित होने पर कई घण्टों व दिनों तक बिजली बहाल नहीं हो पाती है और जो कर्मचारी वर्त्तमान में कार्यरत हैं उन्हें रात दिन निर्धारित समय से ज़्यादा काम करना पड़ता है।

सबसे बड़ी संख्या जूनियर टी मेटों के पदों की ख़ाली है जो कुल स्वीकृत  44 पदों में से केवल मात्र 12 ही भरे हैं जो कुल पोस्टों का पच्चीस प्रतिशत ही है और 32 पोस्टें ख़ाली पड़ी हैं और ये सभी पोस्टें अनुबन्ध पर भरी गयी हैं और रेगूलर एक भी जूनियर टी मेट नहीं है।

इसी प्रकार टी मेटों की 27 पोस्टें स्वीकृत हैं लेकिन उनमें से केबल 3 ही पोस्टें भरी हैं और 24 पोस्टें ख़ाली हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि तथाकथित विकास मन्त्री के विधानसभा क्षेत्र में विकास की असली स्थिति क्या है। इसके अलावा एएलएम की कुल 36 पोस्टों में से 21 पोस्टें ख़ाली हैं। कनिष्ठ अभियंता के 7 औऱ क्लर्कों के 13 पद ख़ाली पड़े हैं।

इससे सपष्ट है कि बिजली विभाग का क्षेत्रीय स्टाफ़ कुल ज़रूरत का एक चौथाई ही कार्यरत है तो ऐसी स्थिति में कोई कैसे नियमित बिजली सप्लाई की उम्मीद कर सकता है। भूपेंद्र सिंह ने सरकार व मंत्री से पूछा है कि जनता को हर समय बिजली उपलब्ध कराने वाले इस विभाग की दुर्दशा के लिए कौन जिम्मेदार है।

उन्होंने मांग की है कि ख़ाली पदों को जल्दी भरा जाये। उन्होंने वर्त्तमान मन्त्री पर आरोप लगाया है कि वे सरकार में अहम भूमिका में होते हुए भी इन पदों को भरने के लिए कियूँ प्रयास नहीं कर रहे हैं। जबकि पूरे प्रदेश में उनकी छवि विकास मंत्री की है लेकिन हक़ीक़त में धर्मपुर की स्थिति उससे उल्टी है।

स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति भी बहुत ज्यादा ख़राब है। कृषि और बाग़वानी विभाग में भी दर्जनों पद ख़ाली पड़े हैं। वे केवल लोकनिर्माण व आई पी एच विभागों में ठेकेदारों के माध्य्म से विकास करवाने को ही अपनी उपलब्धि मानते हैं। जबकि जो भी काम धर्मपुर में ठेके पर हो रहे हैं उनमें कोई पारदर्षिता नहीं है और एक बड़ी फ़ौज ठेकेदारों की खड़ी कर दी गई है जो सब उनके सरक्षंण में काम कर रहे हैं। यहां हो रहे कार्यो के बारे कोई अधिकारी व कर्मचारी सवाल नहीं उठा सकते हैं जिस कारण कार्यों की गुणवत्ता बहुत घटिया किस्म की है और बड़े पैमाने पर भ्र्ष्टाचार व्याप्त है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here