राजतिलक की परंपरा को पूर्व डीजीपी ने बताया अतार्किक और अलोकतांत्रिक

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विक्रमादित्य सिंह के राजतिलक को लेकर पूर्व डीजीपी आईडी भंडारी ने प्रतिक्रिया दी है। पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के निधन के बाद राजतिलक की परंपरा निभाई गई। वीरभद्र सिंह रामपुर रियासत के 122वें राजा था। उनके अंतिम संस्कार से पहले विक्रमादित्य सिंह का राजतिलक कर परम्परा निभाई गई। जिसपर हिमाचल प्रदेश के पूर्व डीजीपी आईडी भंडारी ने सवाल खड़े किए हैं।

पूर्व डीजीपी ने अपने फेसबुक हैंडल से एक पोस्ट डाली है। जिसमें उन्होंने वीरभद्र सिंह के अंतिम संस्कार से पहले रियासत की राजगद्दी उनके बेटे को सौंपे जाने की परंपरा को सीधे तौर पर लोकतांत्रिक परंपराओं और व्यवस्था के विरुद्ध बताया है। उन्होंने इस पोस्ट में दो स्क्रीनशॉट भी शेयर किए हैं। आईडी भंडारी का यह बयान अचानक चर्चा में आ गया है।

उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा है कि ये क्या हो रहा है। विरासत सौंपने का ऐलान करना कुछ और बात है। लेकिन रियासत का राजशाही प्रतिनिधि घोषित करना कुछ और बात है। हमारे आदरणीय श्री वीरभद्र सिंह के निधन पर मैं उतना ही दुखी हूं जितना अन्य लोग। मैं हमेशा से उनका बहुत सम्मान करता था। लेकिन एक लोकतांत्रिक देश के नागरिक के रूप में मध्य काल की तरह राज्याभिषेक को मैं समझ नहीं पा रहा। यहाँ क्या हो रहा है?

उन्होंने लिखा है कि मैं चाहता हूँ कि हम एक गुलाम मानसिकता का समर्थन करने की बजाय अपनी लोकतांत्रिक परम्पराओं पर गर्व महसूस करें। लोकतंत्र और कानून पर मेरे दृढ़ विश्वास के कारण मैं गलत हो सकता हूँ। लेकिन मुझे उन लोगों के लिए खेद है जो इस तरह की अनुचित और अवास्तविक परंपराओं का समर्थन करते हैं।  अपमानजनक अतीत हमारा भविष्य नहीं हो सकता।  माफ़ करना।

पूर्व डीजीपी की यह पोस्ट चर्चाओं में आ गयी है। कुछ लोग इसका समर्थन कर रहें हैं, वहीं कुछ आपत्ति जता रहे हैं।

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