दिवाली के बाद दिल्ली NCR में बढ़ा वायु प्रदूषण, पर्यटकों ने किया पहाड़ों का रुख

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शिमला: दिल्ली, एनसीआर, पंजाब और हरियाणा में दिवाली के बाद बढ़ते वायु प्रदूषण से बचने के लिए पर्यटकों ने पहाडिय़ों का रुख किया है। चैल, कसौली जैसे पर्यटन स्थलों और उनके इलाकों में होटलों और होमस्टे ने वीकेंड में अच्छी व्यस्तता दर्ज की है। हालांकि पिछले कुछ दिनों में पर्यटन सीजन ने दस्तक दे दी है, दिवाली के बाद एक बार फिर बुकिंग बढ़ गई है।

चैल में दो होटलों के मालिक देविंदर वर्मा ने कहा, “इस वीकेंड में लक्जरी होटलों में चैल और उसके आसपास के क्षेत्रों में 80-95 प्रतिशत लोगों की भीड़ देखी गई, क्योंकि पंजाब, हरियाणा और दिल्ली एनसीआर के उच्च श्रेणी के पर्यटकों ने मैदानी इलाकों के वायु प्रदूषण से बचने के लिए पहाड़ियों पर जाना चुना।”

हालांकि, बजट-होटल अधिक पर्यटकों को आकर्षित नहीं करते थे और उनकी ऑक्यूपेंसी केवल 40 से 50 प्रतिशत थी। कसौली के आसपास की पहाड़ियों में फैले होमस्टे की मांग है।

दिल्ली निवासी गिरीश ने बताया कि उन्होंने दिवाली से पहले ही उन्होंने होटल बुक कर लिया गया था, क्योंकि बाद में पसंद की जगह मिलना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने बताया कि वे पिछले एक साल से पहाड़ियों की ओर जा रहे हैं।

उन्होंने कहा, “मैं पिछले साल उत्तराखंड गया था। इस साल मैंने दिवाली के बाद अपने परिवार के साथ कसौली में वीकेंड बिताने का फैसला किया। दिल्ली में वायु प्रदूषण दिवाली के बाद सबसे खराब स्थिति में है और अस्थमा या अन्य फेफड़ों की बीमारियों से पीड़ित बच्चों और बुजुर्गों के लिए हानिकारक है।”

2,250 मीटर की ऊंचाई पर स्थित, चैल विशेष रूप से उन लोगों द्वारा मांग में है जो शहरों की हलचल से दूर एक शांत प्रवास चाहते हैं। पटियाला के बलविंदर ने चुटकी लेते हुए कहा, “प्रदूषण से प्रभावित पंजाब के विपरीत, जहां पराली जलाने और दिवाली के जश्न में लोगों को परेशानी होती है, चैल स्वच्छ और हरे-भरे परिवेश में वीकेंड बिताने के लिए एक उपयुक्त स्थान है।”

कसौली रेजिडेंट्स और होटलियर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष रॉकी चिमनी ने कहा, “इस वीकेंड में कसौली में लग्जरी होटलों में ऑक्यूपेंसी शत-प्रतिशत थी और दिल्ली एनसीआर के पर्यटकों द्वारा अग्रिम बुकिंग की गई थी।”

दिल्ली से पर्यटक अंजली ने कहा, “पहाड़ियों में हवा की गुणवत्ता मैदानी इलाकों के लोगों को राहत देती है। दिल्ली सरकार द्वारा वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लंबे-चौड़े दावों के बावजूद, त्योहार के बाद स्थिति और खराब हो जाती है। छुट्टी के लिए बाहर जाना बुद्धिमानी है।”

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