मंडी में नहीं चला CM फैक्टर, BJP के हाथ से निकली सीट

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विनोद चड्ढा, फॉर हिमाचल वॉइस, मंडी: मंडी के संसदीय क्षेत्र के उपचुनाव में भाजपा को बड़ा झटका लगा है। इस निर्वाचन क्षेत्र में मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र में सीएम फैक्टर को मतदाताओं ने नकार दिया है। कांग्रेस ने भाजपा से मंडी संसदीय क्षेत्र को छीनने में सफलता हासिल कर ली है। बता दे कि भाजपा सांसद राम स्वरूप शर्मा के निधन के बाद ये सीट रिक्त घोषित हुई थी।

चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी प्रतिभा सिंह को टिकट मिलते ही बेटे विक्रमादित्य सिंह ने एक भावुकता भरी पोस्ट सोशल मीडिया में की थी, इसमें विधायक बेटे ने लिखा था कि वोट नहीं वीरभद्र सिंह को श्रद्धांजलि  चाहिए। यह कहा जा सकता है कि 6 बार  प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे वीरभद्र सिंह की पत्नी को जितवाकर मतदाताओं ने उन्हें भी श्रद्धांजलि दी है।

हालांकि इस चुनाव में कांग्रेस वाह भाजपा के बीच जुबानी जंग ने कई मोड़ लिए, नेताओं के बयान सोशल मीडिया में ट्रोल भी हुए, लेकिन मतदाताओं के जहन में कुछ और ही चल रहा था, चूंकि यह हल्का मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का गृह क्षेत्र भी है। लिहाजा आने वाले समय में चुनाव हारने के बाद सीएम जयराम ठाकुर की भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। सुबह मतगणना शुरू होने के बाद कई उतार-चढ़ाव आए। हालांकि भाजपा ने बीच में प्रतिभा सिंह के लीड लेने के बावजूद हिम्मत नहीं हारी थी मगर धीरे-धीरे उम्मीद निराशा में बदल गई।

चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस प्रत्याशी प्रतिभा सिंह द्वारा कारगिल युद्ध को दिए गए बयान को बीजेपी ने खूब भुनाने की कोशिश की, इसका असर शायद मतदाताओं पर नहीं हुआ। बाद में द्रंग के विधायक जवाहर ठाकुर एक ऐसा बयान दे बैठे, जिससे बीजेपी को भी बैकफुट पर आना पड़ा था। इसमें विधायक ने कहा था कि हमारे इलाके में जब महिला के पति की मौत हो जाती है तो वह एक साल तक घर पर ही बैठकर शोक करती है, ऐसे में प्रतिभा सिंह को चुनाव लड़ने की क्या आफत पड़ी थी चूंकि इस बयान में भाजपा विधायक सीधा प्रतिभा सिंह पर निजी हमला था। लिहाजा मतदाताओं ने भी इसे गंभीरता से से लिया होगा।

चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी 3,65, 650 को मत पड़े जबकि भाजपा के ब्रिगेडियर खुशाल ठाकुर को 3,56,884 पर संतोष करना पड़ा है। ये पूर्वानुमान सही साबित हुआ कि जीत का अंतर मामूली हो सकता है। चुनावी परिणाम को लेकर हर पल धड़कनें बढ़ती रही। अंतिम चरण में कांग्रेस प्रत्याशी 8766 मतों से आगे थे।

सबसे बड़ी बात ये है कि इस संसदीय क्षेत्र में नोटा सहित निर्दलीय उम्मीदवारों की मौजूदगी ने भी भाजपा का खेल बिगाड़ दिया। नोटा को 1.7 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए थे।

ये आंकड़ा, 12,626 मतों का था। इससे ये भी संकेत मिलते हैं कि मतदाताओं में बीजेपी के साथ-साथ कांग्रेस से भी नाराजगी थी। कांग्रेस व भाजपा के मतों के अलावा बात की जाए तो 2.72 प्रतिशत मतदाता ऐसे थे, जिन्होंने कांग्रेस व भाजपा के खिलाफ वोट किया।

बता दें कि भाजपा ने ये सीट 1.18 प्रतिशत के अंतर से हारी है। आपको ये भी स्पष्ट कर दें कि इन आंकड़ों में अंतिम नतीजे के बाद मामूली फेरबदल हो सकता है।

उधर अंतिम समाचार के मुताबिक मंडी संसदीय क्षेत्र के पोस्टल वोट्स की मतगणना जारी थी। लेकिन कांग्रेस प्रत्याशी की जीत तय हो गई। इसमें कांग्रेस प्रत्याशी को 49.23 वोट मिले, जबकि बीजेपी को 48.05 पर संतोष करना पड़ा।

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