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हिमाचल: नवोदय विद्यालय की प्रवेश परीक्षा पास करने के बावजूद सिस्टम के आगे फेल हो गई नंदिनी

कांगड़ा: भारतवर्ष में साक्षरता के अधिकार की मुहिम पर सरकार तो बहुत बल देती है लेकिन यहां किस्सा कुछ ऐसा है कि एक बच्ची को स्कूल में दाखिला दिलवाने के लिए प्रशासन के भी हाथ खड़े हो गए हैं। हिमाचल की एक मेधावी छात्रा जिसने नवोदय विद्यालय के हर कठिन परीक्षा को पास कर लिया, सिस्टम के कारण फेल हो गई।

हर माता-पिता का सपना होता है कि उनका बच्चा अच्छे स्कूल में पढें, अच्छी शिक्षा ले। जहां एक तरफ सरकार बेटी पढाओ, बेटी बचाओ या निरक्षरता दूर भगाओ, सबको समानता का अधिकार मिले के बड़े बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी ओर शिक्षा को जाने कितने भागों में बांट दिया गया है। 

हाल ही में नवोदय विद्यालय के लिए चयनित हुई मेधावी आठ वर्षीय नंदिनी सुकेटिया नाम की बच्ची के सपनों को जैसे पंख मिल गए। मध्यवर्गीय परिवार से संबंध रखने वाली इस बच्ची के पिता भूतपूर्व सैनिक हैं। बच्ची के नवोदय विद्यालय में उतीर्ण होने से माता-पिता की खुशी दुगनी हो गई। लेकिन जब बच्ची का दाखिला करवाने के लिए माता-पिता नवोदय विद्यालय गए तो उन्हें ये बोल कर वापस भेज दिया गया कि आपने जिस स्कूल में बच्ची को पिछले 4 वर्ष पढाया है, उस क्षेत्र का प्रमाण पत्र लेकर आइए।

अभिभावकों ने तथाकथित कागजात तैयार करके स्कूल प्रशासन को सौंप दिए। लेकिन बावजूद इसके बच्ची का दाखिला नहीं हो पाया। अभिभावकों द्वारा कागजों को इकट्ठा करने का सिलसिला लगातार दो महीने तक चलता रहा। बच्ची का दाखिला नवोदय विद्यालय में करवाने के लिए बच्ची के माता-पिता ने शायद ही ऐसा कोई कार्यालय होगा जहां दस्तक न दी हो। हालांकि बच्ची ने कडी मेहनत करके परीक्षा पास की थी। फिर भी दाखिले के लिए बच्ची के अभिभावक ना जाने कितने जोड़ी जूते भटक-भटक कर घिस चुके हैं। 

दूसरी ओर स्कूल प्रशासन का कहना है कि इनके डाक्यूमेंट में एरिया गलत भरा है और हमने अभिभावक से रेवेन्यू डिपार्मेंट से एरिया के कागजात लाने को कहा है, जो अभी तक नहीं आए।

आपको बता दें कि जिस एरिया में बच्ची का स्कूल था, वह आर्मी एरिया है। ये एरिया न तो रूरल एरिया में आता है और न ही अर्बन एरिया में आता है। 2006 से कथित स्कूल एरिया में डिस्प्यूट चल रहा है। इसी कारण यहां 2006 के बाद प्रधान, पंच के चुनाव तक नहीं हुए हैं। यही कारण है कि कोई भी रेवेन्यू अधिकारी इस एरिया के संदर्भ में लिख कर देने को तैयार नहीं। 

ऐसे में अच्छा पढने लिखने वाली बच्ची का भविष्य बीच मझधार में अटक कर रह गया है। वहीं, परिजनों का बड़े दुख के साथ कहना है कि हमारी बच्ची ने परीक्षा पास की है। उसकी मेहनत को देखते हुए उसका दाखिला होना चाहिए न की एरिया को देखते हुए बच्चे के सपने विभाजित करने चाहिए। 

उन्होंने सरकार से मांग की है कि बच्चों का उनकी मेहनत के हिसाब से नवोदय स्कूल दाखिला होना चाहिए, ना कि एरिया या कोटा सिस्टम को बीच में लाकर शिक्षण संस्थानों को चलाया जाए। खैर मामला अकेले इस बच्चे का ही नहीं है। इसीलिए लड़की के पिता रमन सुकेतीया लगातार दृढ़ता के साथ न्याय का रास्ता ढूंढ रहे हैं ताकि ऐसे होनहार छात्रों को शिक्षा का हक पाने के लिए किसी के आगे हाथ ना फ़ैलाने पड़े।

इस बारे डीसी कांगड़ा निपुण जिंदल का कहना है कि नवोदय विद्यालय को भी इस संदर्भ में पत्र लिखा गया है। इस मामले को संबंधित प्राधिकारियों के सामने रखा जाएगा और इस मामले में जो भी संभावना होगी उसे पूरा करने की कोशिश की जाएगी।

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