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जोगिंदर नगर में दूसरी बार रुका डिजिटल सर्वेक्षण और डिजिटल डोर नंबर के निर्धारण का कार्य

सेंट्रल कमर्शियल इंडस्ट्री ऑफ इंडिया चेरिटेबल ट्रस्ट (CCIICT) एक संस्था है जो चैरिटी के अलावा शहरी नगर पालिका क्षेत्र में डिजिटल सर्वेक्षण और डिजिटल डोर नंबर के निर्धारण का कार्य कर रही है। संस्था द्वारा यह कार्य देशभर के विभिन्न राज्यों में किया जा रहा है। इन दिनों हिमाचल प्रदेश में भी कई नगर परिषद क्षेत्रों में यह कार्य चला हुआ है। मंडी जिला के जोगिंदर नगर में भी यह कार्य चला हुआ था, जो हाल ही में बंद हो गया। यहाँ मुख्य बात यह है यह कार्य कुछ ही समय में दूसरी बार बंद हुआ।

जब दूसरी बार काम रुका तो लोगों के बीच से यह बात भी निकलकर आने लगी कि संस्था द्वारा एक ही बार में काम क्यों पूरा नहीं किया जा रहा है। हमने संस्था की वेबसाइट पर दिए गए हेल्पलाइन नम्बर पर संपर्क किया, तो हमें हमारे किसी भी सवाल का कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। यहाँ बता दें कि यह हेल्पलाइन नंबर संस्था के असिस्टेंट डायरेक्टर अरेन्दू का था।

हालांकि इसके बाद संस्था के स्टेट प्रोजेक्ट हेड हिमाचल प्रदेश ने हमसे संपर्क किया। हमने उनसे भी वही सवाल पूछे जो हेल्पलाइन नंबर पर फोन कर पूछे थे। हालांकि स्टेट प्रोजेक्ट हेड ने सभी सवालों का जवाब जरूर दिया मगर उसके बाद कुछ और चीज़ें सामने निकलकर आईं।

इसके बाद हमने जोगिंदर नगर में यह कार्य कर रहे दो डेवलपमेंट एक्सिक्यूटिव से जब यही सवाल पूछे तो उनके जवाब कुछ और थे। इसके बाद हमने दोबारा स्टेट प्रोजेक्ट हेड से संपर्क किया। उन्होंने हमें दोबारा वही जानकारी दी जो पहले दी थी। इसके बाद हमने एक बार फिर हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क किया लेकिन वो हमसे सीधे मुँह बात करने को तैयार ही नहीं थे। वो हमें यही बोलकर टालने का प्रयास करते रहे कि यह संस्था का आंतरिक मामला है।

अब यहां हम अपने मुख्य सवाल पर आते हैं जो हमारी रिसर्च के दौरान हमारे सामने आया। जब हम संस्था की वेबसाइट पर गए तो हमें एक नोटिस दिखा। यही नोटिस संस्था के फेसबुक पेज पर भी मौजूद है। यह एक पब्लिक नोटिस है। यहाँ देखें नोटिस का फोटो:

हमने इसी नोटिस पर लिखी बात चारों लोगों से बारी-बारी पूछी। दोनों डेवलमेंट एक्सिक्यूटिव ने कुछ और कहा, जबकि स्टेट प्रोजेक्ट हेड ने कुछ और कहा। जब हमने अंतिम पुष्टि के वापस असिस्टेंट डायरेक्टर अरेन्दू से संपर्क किया और उनसे भी यही सवाल पूछा। तो वह फिर इसे आंतरिक मामला बताने लगे। यहाँ हम यह सोचने के लिए भी मजबूर हुए की जो बात संस्था ने एक नोटिस के तौर पर सार्वजनिक रूप से अपनी वेबसाइट और फ़ेसबुक पेज पर लिखी है। संस्था के असिस्टेंट डायरेक्टर वही बात कह क्यों नहीं पा रहे। उनसे पूछने पर वह बात आंतरिक मामला कैसे हो जा रहा तो पहले से सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध है। पहले की तरह इस बार भी उनका सन्तोषजनक जवाब नहीं मिल पाया।

हालांकि इसके बाद उन्होंने खुद हमसे संपर्क किया और हमें कंपनी के दूसरे असिस्टेंट डायरेक्टर दीप कुमार दास का नम्बर दिया और उनसे बात करने को कहा। उन्होंने हमें यह भी बताया कि दीप कुमार दास ही हिमाचल का कार्य देखते हैं।

जब हमने दीप कुमार दास जी से बात की तो उन्होंने हमारे सभी सवालों के जवाब स्पष्ट रूप से दिए। उनसे जब हमने पूछा कि क्या संस्था से जुड़े किसी भी व्यक्ति को संस्था के नाम पर किसी भी रुप में किसी व्यक्ति से पैसा लेने का अधिकार है। तो उन्होंने साफ तौर पर इससे इनकार किया। उन्होंने कहा कि संस्था से जुड़ा कोई भी व्यक्ति की किसी भी सूरत में संस्था के नाम पर पैसा नहीं ले सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि यदि कोई व्यक्ति संस्था के नाम पर ऐसा कार्य करता है और इसकी सूचना संस्था को मिलती है तो संस्था द्वारा तुरंत प्रभाव से उस व्यक्ति को उसके पद से बर्खास्त कर दिया जाएगा।

दीप कुमार दास ने यह भी माना कि दो बार जोगिंदर नगर में चला कार्य बंद हुआ है। उन्होंने बताया कि पहली बार इस कार्य में लगी टीम को अपनी पढ़ाई के चलते जाना पड़ा, जिस वजह से काम बंद हुआ। जबकि दूसरी बार इस कुछ नहीं है। उन्होंने बताया कि सिर्फ थोड़ा सा काम बचा हुआ है। जिसकी जानकारी ली जा रही है और सब शुक्रवार तक उसे भी पूरा कर लिया जाएगा।

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