सरकार-प्रशासन! छोटा भंगाल और चौहारघाटी की तरफ भी दो ध्यान

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एसएफआई और डीवाईएफआई मुल्थान छोटा भंगाल, बरोट ने मंगलवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि देश प्रदेश की तरह छोटा भंगाल और चौहारघाटी में कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर कहीं अधिक भयंकर साबित हो रही है। संक्रमितों की संख्या व इससे होने वाली मौतों का आंकड़ा तेजी से बढ़ता ही जा रहा है, सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव और सरकार के रविये ने इस संकट को ज्यादा गंभीर बनाया है। पिछले दिनों हुई कोरोना टेस्टिंग के दौरान संक्रमण के मामलों में काफी तेजी देखी गई है, लेकिन सरकार व स्थानीय प्रशासन इन मामलों को गंभीरता से नहीं ले रहा है।

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साथ ही साथ छोटा भंगाल की लोहारडी क्षेत्र में प्राइमरी हेल्थ सेंटर तरमैहर और बरोट समेत सभी स्वास्थ्य केंद्र, डिस्पेंसरियां भी दयनीय स्थिति से गुजर रहे है। यहां कोई बड़ा अस्पताल न होने की वजह से भी लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इन प्राइमरी हेल्थ सेंटरों में दवाइयों का अभाव है, ऑक्सिमीटर, बेड, इमरजेंसी ऑक्सीजन सिलिंडर, एम्बुलेंस, डॉक्टर व स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। कोई डॉक्टर अगर पॉजिटिव आता है तो रिप्लेसमेंट के तौर पर कोई दूसरा नहीं है और ना ही कोविड-19 से निपटने के लिए उचित उपकरण है।

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वहां के लोगों की प्रॉपर टेस्टिंग भी नही हो पा रही है। साथ ही साथ वैक्सीनेशन में भी बहुत से लोगों (45+) को भी वैक्सीन नहीं लगी है। नेटवर्क नहीं होने की वजह से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन नहीं कर पाए है। वैक्सीनेशन का काम भी प्रभावी रूप से नहीं हो पा रहा है। इन कमियों की वजह से छोटा बंगाल के लोहारडी क्षेत्र में लगातार मामले बढ़ रहे हैं। लोगों की मौतें हो रही हैं।

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प्राइमरी हेल्थ सेंटर में पूरा स्टाफ पॉजिटिव आने के कारण वहां के लोगों की कोरोना टेस्टिंग को रोक दिया गया है, जिसके कारण वहां के लोगों की सही से जांच ना होने के कारण व स्टाफ की कमी के कारण मौतें हो रही हैं। यह सब प्रदेश सरकार की नाकामी और उनके लोगों के प्रति नजरिए को दर्शाता है कि प्रदेश सरकार लोगों के स्वास्थ्य के प्रति व कोरोना संक्रमण के प्रति कितना सचेत है। जब आवश्यकता थी कि ऐसी महामारी से निपटने के लिए तैयारियां करनी चहिए थी उस वक्त चुनाव, रैलियों और समारोह में व्यस्त रही। 

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एसएफआई व डीवाईएफआई ने सरकार व स्थानीय प्रशासन से अपील व मांग की है कि वहां टेस्टिंग की पूरी व्यवस्था की जाए। डॉक्टर, नर्स, फार्मासिस्ट व अन्य स्टाफ मुहैया कराया जाए। साथ ही साथ पंचायत वाइज टेस्टिंग की जाए। रोजाना कोरोना टेस्ट के लिए गाँव-गाँव में कैम्प आयोजित किए जाएं, ताकि संक्रमित लोगो का सही आंकड़ा पता किया जा सके और कोरोना से प्रभावित होने वाले लोगो का पता लगाया जा सके। टेस्ट के अभाव में किसी की मृत्यु ना हो और उसे कोरोना का उपचार शुरुआती दौर में ही मिल जाए। प्राइमरी हेल्थ सेंटर में हर रोज कोविड सैंपलिंग की व्यवस्था हो। वैक्सीनेशन के काम में तेजी लाई जाए और सभी नागरिकों के लिए वैक्सीन उपलब्ध करवाई जाएं।

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मरीजों के लिए अतरिक्त एंबुलेंस, इमरजेंसी ऑक्सीजन व जरूरी दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकें और दोनो घाटियों में पीएचसी के साथ-साथ डिस्पेंसरियों की स्थितियों को भी सुदृढ़ करें ताकि जल्द से जल्द लोगो को अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई जासकें और महामारी से निजात पा सकें। इसके साथ ही सरकार व स्थानीय प्रशासन को एसएफआई और डीवाईएफआई ने यह भी आश्वस्त किया कि उनके संगठन इस आपदा के समय हर प्रकार से प्रशासन की हर संभव मदद के लिए तैयार हैं।

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