हिमाचल: सीमेंट नहीं मिलने से पंचायतों में रुके विकास कार्य

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धर्मशाला। प्रदेश की पंचायतों में मनरेगा के तहत किए जाने वाले विकास कार्यों के लिए पिछले आठ-नौ माह से सीमेंट नहीं मिल रहा है। इससे विकास कार्य ठप हो गए हैं। हिमाचल प्रदेश की पंचायतों में महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत कई विकास कार्य शुरू किए गए हैं, लेकिन सीमेंट नहीं पहुंचने से काम लटक गए हैं। इससे मनरेगा मजदूरों को रोजगार भी नहीं मिल रहा है।

हालात यह हैं कि सीमेंट न होने से मनरेगा के तहत दिहाड़ी लगाकर गुजर-बसर करने वाले मजदूर बेकार बैठे हैं। संबंधित पंचायत प्रधानों से कार्य शुरू करने की लगातार मांग कर रहे हैं।

विकास खंड धर्मशाला के तहत प्रधान-उपप्रधान संगठन के प्रधान सुरेश कुमार ने बताया कि पिछले आठ-नौ माह से पंचायतों में सीमेंट नहीं आ रहा है। इससे उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सीमेंट कार्य शुरू करने से पहले एक मस्टररोल लगाना पड़ता है। इसमें कुछ सामान एकत्रित किया जाता है। पंचायतों में मस्टररोल के तहत सामान तो इकट्ठा कर लिया गया, लेकिन अभी सीमेंट नहीं पहुंचा है। कार्यस्थल पर मनरेगा मजदूरों की ओर से एकत्रित किया गया रेत-बजरी और पत्थर भी गायब हो चुका है।

जिला पंचायत अधिकारी कांगड़ा अश्विनी शर्मा ने बताया कि वित्तायोग के तहत किए जा रहे कार्यों के लिए सीमेंट आ रहा है, लेकिन मनरेगा के तहत किए जाने वाले कार्यों के लिए सिविल सप्लाई विभाग सीमेंट भेजता है। इसके लिए एडवांस पैसा जमा करवाना पड़ता है। यह पैसा शिमला से आता है। हो सकता है पैसा नहीं आया हो, जिसके चलते सीमेंट की सप्लाई रुकी हो।

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