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हिमाचल के सरकारी कर्मचारियों ने बढ़ाई जयराम सरकार की टेंशन, बजट सत्र में अंदर-बाहर हंगामा

शिमला। राजस्थान की कांग्रेस सरकार द्वारा पुरानी पेंशन लागू करने की घोषणा के बाद अब अन्य राज्यों में भी पुरानी पेशन बहाल करने की मांग लगातार उठने लगी है। हिमाचल प्रदेश में इसको लेकर एक बड़े आंदोलन की भी तैयारी हो चुकी है जिसकी नीव कर्मचारियों ने मंडी से शिमला पैदल यात्रा शुरू कर और मजबूत कर दी है| जिसके बाद हिमाचल सरकार के सामने एक के बाद एक चुनौतियां बढ़ रही हैं।

गौर हो कि केंद्र सरकार के फैसले के बाद हिमाचल ने वर्ष 2003 में इसके आलावा कई राज्यों ने 2005 में कर्मचारियों की पेंशन योजना को एक प्रकार से बंद करते हुए नए स्वरूप में लागू किया था। इससे उनकी पेंशन काफी कम हो गई थी। कर्मचारी वर्ग समय-समय पर दोबारा से पुरानी पेंशन स्कीम को लागू करने की मांग करते रहे हैं।

हिमाचल प्रदेश में अभी न्‍यू पेंशन स्‍कीम कर्मचारी एसोसिएशन के बैनर तले हजारों कर्मचारियों ने तीन मार्च को शिमला विधानसभा के घेराव की रणनीति बनाई है। इसके लिए मंडी से पदयात्रा शुरू की गई है, जो शिमला की ओर रवाना हो रही है। यदि सरकार ने ओपीएस यानी ओल्‍ड पेंशन स्‍कीम की घोषणा नहीं की तो तीन मार्च को शिमला में बड़े स्‍तर पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

दरअसल हिमाचल में चुनावी वर्ष के चलते प्रदेश में हर वर्ग का कर्मचारी आंदोलनरत है, मांगें मनवाने के लिए हर स्तर पर धरने, प्रदर्शन, विरोध कर रहे हैं। विपक्षी दल ने भी कर्मचारयों की मांगों को सत्ता में आने के बाद पूरा करने की हामी भर दी है। इससे सरकार पर दबाब बढ़ता ही जा रह है।

ऐसे में जयराम सरकार कर्मचारियों की नाराजगी दूर करने के लिए तुरूप का कार्ड खेल सकती है और अंतिम बजट में पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने का ऐलान कर सकती है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बजट तैयार कर रहे वित्त विभाग के अधिकारियों ने इस संबंध में चर्चा की है। चार मार्च को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की ओर से पेश किए जाने वाले अंतिम बजट में सरकार पेंशन बहाली का बड़ा निर्णय ले सकती है।

यदि ऐसा होता है तो वर्ष 2003 से लेकर सरकारी नौकरियों में आए डेढ़ लाख कर्मचारियों को पेंशन सुविधा का लाभ होगा। यदि ऐसा होता है तो वर्ष 2003 से लेकर सरकारी नौकरियों में आए डेढ़ लाख कर्मचारियों को पेंशन सुविधा का लाभ होगा। सेवानिवृत्‍त होने पर प्रत्येक कर्मचारी को पेंशन का भुगतान करने के लिए गणना होगी।

बता दें कि यदि पुरानी पेंशन लागू होती है तो वह राज्य के कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करेगी बल्कि उन्हें पूरे समर्पण के साथ काम करने के लिए प्रेरित करेगी जिससे अच्छा कामकाज और सुशासन मिलेगा। गौर हो कि नई योजना में कर्मचारियों की पेंशन राशि पूरी तरह से बाजार पर निर्भर है।

कर्मचारियों का कहना है कि पुरानी योजना के तहत उन्हें महीने के अंतिम वेतन का पचास फीसद पेंशन के तौर पर हर माह मिलेगा जबकि नई योजना में यह अनिश्चित है। राज्य सरकार के एक कर्मचारी ने कहा,’‘कर्मचारियों में भविष्य को लेकर बहुत असुरक्षा थी और पूरे प्रदेश में असंतोष बढ़ने लगा है। इससे कर्मचारियों के कामकाज पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

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