देहुरी दुर्गा मां भक्तों की हर मनोकामना करती है पूर्ण

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आनी, मधु शर्मा। आनी उपमंडल की तहसील आनी के देहुरी में काष्ठ कला से निर्मित अति प्राचीन मंदिर जिसकी दीवारों पर टांकरी व शारदा लिपि के आलेख किया गया  हैं । इसके अतिरिक्त राजा रणजीत सिंह तथा राजा रघुवीर सिंह के शिकार प्रेमी होने के प्रमाण का भी आलेख मंदिर में  हुआ है। प्राचीन मंदिर में कई पशु पक्षियों के चिन्ह  आज भी यहाँ स्थापित हैं ।

देवी मां के अधीन कश्टा ,रुना और थरोग में शाखा मंदिर होने के साथ-साथ गाँव तलुणा, आनी, जाबन, न्महोंग, बखनाओ और बयूंगल पंचायतों के गाँव माता के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं ।माता केवल त्रिशूल वास  करके अपनी शोभायात्रा पर निकलती है , मां रथ  पर वास नहीं करती है। 

देवी  मां के सानिध्य में क्षेत्र की सुख समृद्धि के लिए कई मेलों और त्योहारों का आयोजन  समय समय पर होता है । देवी का विशेष मेला गाँव कश्टा में तीन या चार वर्ष के उपरांत 9 से 11 कार्तिक तक मनाया जाता है । देवी माता के इस मेले में हजारों लोगों शोभा बढ़ाने आते है ।  कष्टा मेले में ढ़ोल नगाड़ों की ताल पर गाँव के बीचों बीच जश्न और उमंग का माहौल बनता है ।

थबोली, कष्टा व आसपास के दूसरे गांव की महिलाएं पारम्परिक वश भूषा  पहनकर मेले की शोभा बढ़ाने में चार चांद लगा देते है । कष्टा गांव की सभी महिलाएं पारंपरिक भेषभूषा में सुसज्जित प्राचीन वाद्य यंत्रों पर मनमोहक नाटी पेश करती हैं जिसमें माता का गुर  धुर में नाचता है ।

एक मान्यता अनुसार किसी समय कष्टा गाँव के दलित वर्ग के एक व्यक्ति को खेत में काम करते हुए धरती से एक प्रतिमा मिली । उसने इसके विषय में गांवालों को बताया ,सभी दुविधा में पद गए कि प्रतिमा की स्थापना कहाँ की जाए । तब गमा नाम के ज्योतिषी को देवी मां ने स्वप्न में दर्शन देकर बताया कि इस  दुर्गा माता प्रतिमा की स्थापना देहुरी में की जाए।

इसकी स्थापना “देहुरी दुर्गा मां”के नाम से देहुरी गाँव में मंदिर का निर्माण करके किया गया । तब लोगों ने गाँव एक भव्य मंदिर का निर्माण किया जिसमें माता दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की गई । देबी माता दुर्गा देहुरी मंदिर में स्थानीय ग्रामीण मेला  भी मनाया जाता है चार साल बाद भगवत कथा आदि, धार्मिक आयोजन महायज्ञ कायक्रम आयोजित होते हैं , माता का छबी  क्षेत्र में पर्यटन की अपार सभावना है जिला कुल्लू का आऊटर सिराज देवी देवता की भूमि है ।

देवी माता देहुरी एक तपोसथली के रूप मे मशहूर है आनी क्षेत्र के मध्य सुंदरता रमणीक जाबन मे देवी  देउरी माता  के नाम से हर घर मे पूजा की जाती हैं । महा शिवरात्रि, फाग ,दीवाली और होली हर उतसव  को मां के मंदिर में मनाया जाता है। हिमाचल प्रदेश के जिला कुल्लू का आउटर सिराज क्षेत्र में देवी माता देहुरी दुर्गा मन्दिर आनी खण्ड की ग्रांम पचायत जाबन के गांव देहुरी में स्थित है। जबान ग्रीन बेली के नाम से विख्यात है। देवी माता देहुरी दुर्गा को देवी माता पछला के नाम से जाना जाता है । देवी माता का दूसरा मन्दिर स्थल गांव कश्टा में स्थित है।

देवी माता देहुरी के कारदार लीलाचन्द ठाकुर ने बताया कि हिमाचल प्रदेश के हर जिला हर क्षेत्र के लोग देवी माता के दर्शन व आर्शीबाद लेने के लिए आते है मां सभी भक्तों की मनोकामना पूर्ण करती है तभी भक्तों का तांता यहां लगा रहता है।  साल भर में जब भी यहां कोई धार्मिक उत्सव होता है तो लोग  देवी माता देहुरी के दर्शन करने आते है।

आनी व्यापार मण्डल भी देवी दुर्गा के प्रति हर साल पूजापाठ व भण्डारे का आयोजन करते है। देवी माता की कृपा आनी क्षेत्र व पुरे प्रदेश के भक्तों पर हमेशा बनी रहती है। देवी माता के पुजारी, चौकीदार, माता के सभी कारगुजारी, कुल पुरोहित माता के हर कार्य मे बड़ी निष्ठा के साथ कार्य करते है। सभी कार्य प्रेम प्यार से पूर्ण किये जाते है।

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