लाइनमैन का बेटा बिना कोचिंग के बन गया सिविल जज, बताया सफलता का मंत्र

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भले ही आपकी आपके घर की स्थति-परिस्थिति कैसी भी और कितनी भी जटिल क्यों ना हो अगर आपके मन में हौसला है तो आप कड़ी मेहनत और लगातार परिश्रम की बदौलत किसी भी लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं। इस बात को चरितार्थ किया है हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले स्थित पच्छाद उपमंडल के तहत आते वागपशोग पंचायत के निचला पांनवा निवासी शशिकांत शर्मा ने।

बीजली बोर्ड में सहायक लाइममैन के इस बेटे ने दिन रात कड़ी मेहनत कर सिविल जज की परीक्षा पास कर अपने माता-पिता समेत पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। बता दें कि शशिकांत शर्मा पच्छाद उपमंडल के दूसरे वह सराहां बार एसोसिएशन से ताल्लुक रखने वाले पहले जज बने हैं। उनकी यह सफलता इस बजह से और भी खास हो जाती है क्योंकि उन्होंने बिना कोइ कोचिंग किए यह परीक्षा पास की है। 

शशिकांत शर्मा ने पीजी कॉलेज नाहन से 2006 में कला संकाय में स्नातक की। इसके बाद उन्होंने 2006 से 2009 में निजी संस्थान से क़ानूनी पढ़ाई की। 2009 से 2011 तक कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से पत्राचार से एलएलएम किया। 2009 से सराहां तथा जिला कोर्ट नाहन में प्रैक्टिस भी शुरू कर दी। 

वहीं, साल 2020 में हिमाचल प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन द्वारा सिविल जज की लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी। इसी संदर्भ में हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा 1 से 3 जुलाई तक साक्षात्कार लिए गए। जिसके बाद 3 जुलाई देर रात परीक्षा का परिणाम घोषित हुआ।

शशिकांत शर्मा ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि वो रोजाना 5 से 6 घंटे सिविल जज की परीक्षा की तैयारियां करते थे। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता व परिजनों को दिया है। इसके साथ ही शशिकांत शर्मा ने बताया कि पिता रमेश दत्त विद्युत बोर्ड से असिस्टेंट लाइनमैन के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं, जबकि माता लीला शर्मा गृहणी है। 

शशिकांत शर्मा उनके दो भाई प्रवीण शर्मा तथा श्याम दत्त हैं। उन्होंने बताया कि इस परिक्षा की तैयारी के लिए वह अपने सीनियर्स की लाइब्रेरी का उपयोग करते थे। इतना ही नहीं वे ऑनलाइन स्टडी भी किया करते थे।

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