लाचार आवारा गाय की सेवा करने के लिए नपं अध्यक्षा और पशुपालन विभाग आया आगे

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मधु शर्मा, आनी। आनी नगर पंचायत में आवारा पशु घूमते हुए पाये जाते है। आये दिनों कहीं न कहीं कोई पशु किसी विपदा में फंसता रहता है। आनी खण्ड के समाजसेवी समाजसेवा के क्षेत्र में आगे आते है।

जहां तक हिन्दू धर्म की बात की जाए तो हिंदू धर्म में गाय को माता कहा गया है। पुराणों में धर्म को भी गौ रूप में दर्शाया गया है।भगवान श्रीकृष्ण गाय की सेवा अपने हाथों से करते थे और इनका निवास भी गोलोक बताया गया है। इतना ही नहीं गाय को कामधेनु के रूप में सभी इच्छाओं को पूरा करने वाला भी बताया गया है।

पिछले कुछ दिनों से एक गाय आनी नगर पंचायत आनी के आस पास में अस्वस्थ चल रही थी उसकी सुध लेने वाला कोई आगे नही आया जब इस बारे में नपं अध्यक्षा सरसा देवी को पता चला तो उन्होंने पशुपालन विभाग आनी के कर्मचारियों का सहयोग पाकर गाय का उपचार करना शुरू किया।

नपं अध्यक्षा सरसा देवी का मानना है कि हिंदू धर्म में गाय के महत्व के पीछे कई कारण हैं जिनका धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व भी है। आज भी भारतीय समाज में गाय को गौ माता कहा जाता है।

शास्त्रों के अनुसार, ब्रह्मा जी ने जब सृष्टि की रचना की थी तो सबसे पहले गाय को ही पृथ्वी पर भेजा था। सभी जानवरों में मात्र गाय ही ऐसा जानवर है जो मां शब्द का उच्चारण करता है, इसलिए माना जाता है कि मां शब्द की उत्पत्ति भी गौवंश से हुई है। गाय हम सब को मां की तरह अपने दूध से पालती-पोषती है। आयुर्वेद के अनुसार भी मां के दूध के बाद बच्चे के लिए सबसे फायदेमंद गाय का ही दूध होता है। 

पशु पालन विभाग आनी के कर्मचारियों के अनुसार गाय जल्द स्वस्थ होकर चलने फिरने लगेगी, नगर पंचायत अध्यक्षा सरसा देवी ने लोगों से सहयोग की अपील की है।

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